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हमीरपुर: सरकारी बंजर भूमि पर अवैध प्लाटिंग का आरोप, तहसील परिसर में प्रदर्शन

 भूमाफियाओं के हौसले बुलंद, सरकारी बंजर भूमि की अवैध प्लाटिंग शिकायतकर्ता को धमकाने का आरोप

  • एक दर्जन से अधिक लोगों ने राठ तहसील परिसर में स्थानीय प्रशासन के विरुद्ध लगाए मुर्दाबाद के नारे

संवाददाता रामसिंह राजपूत हमीरपुर 

हमीरपुर जनपद की राठ तहसील में उस समय हंगामा मच गया, जब एक दर्जन से अधिक लोगों ने तहसील परिसर में प्रदर्शन करते हुए पुलिस प्रशासन हाय-हाय और एसडीएम मुर्दाबाद के नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि नगर क्षेत्र में सरकारी बंजर भूमि पर राजस्व कर्मियों की मिलीभगत से अवैध प्लाटिंग कर महंगे दामों में बिक्री की गई है।

कोतवाली राठ क्षेत्र के पठानपुरा मोहल्ला निवासी राजेंद्र कुमार पुत्र रामकृपाल ने बताया कि नगर क्षेत्र के कुछ कथित भूमाफियाओं द्वारा मौजा राठ पूरब स्थित गाटा संख्या 664 की सरकारी बंजर भूमि पर अवैध रूप से प्लाटिंग कर दी गई। इस संबंध में उन्होंने कई बार स्थानीय प्रशासन, जिला प्रशासन, जिलाधिकारी, कमिश्नर, उपजिलाधिकारी और कोतवाली में शिकायत की, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

राजेंद्र कुमार का आरोप है कि शिकायत करने के बजाय प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा शिकायत की जानकारी कथित भूमाफियाओं को दे दी गई, जिससे वे शिकायतकर्ता को निजी रंजिश मानकर धमकाने लगे हैं। पीड़ित का कहना है कि न केवल उसे लगातार धमकियां मिल रही हैं, बल्कि उसकी निजी कृषि भूमि पर कब्जा करने की साजिश भी रची जा रही है।

शिकायतकर्ता के अनुसार राजस्व विभाग द्वारा मौके पर नाप-जोख कर बंजर भूमि की पहचान और सीमांकन किया गया, इसके बावजूद अवैध प्लाटिंग के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे भूमाफियाओं के हौसले और बढ़ गए हैं और अवैध प्लाटिंग का कार्य लगातार जारी है। पीड़ित ने बताया कि धमकियों और कब्जे के प्रयासों के चलते वह और उसका परिवार मानसिक तनाव में है। पीड़ित ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सरकारी बंजर भूमि को कब्जामुक्त कराने तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

उपजिलाधिकारी अभिमन्यु कुमार ने बताया कि प्रदर्शन कर रहे लोग स्वयं ट्रैक्टर खड़ा कर अतिक्रमण कर रहे थे, जिसे 28 जनवरी को पुलिस द्वारा हटवाया गया था। उन्होंने कहा कि संबंधित भूमि आबादी क्षेत्र में आती है, जिसमें एक पक्ष द्वारा वर्ष 1972 में तथा दूसरे पक्ष द्वारा 1988 में बैनामा और दाखिल-खारिज कराया गया है। दोनों पक्षों को सिविल कोर्ट में जाने की सलाह दी गई है।

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